॥मरम्मत करने आया हूँ अपने आँखों की, क्यूंकि लोग गलत समझ लेते है; मै तो शराफत से देखता हूँ उसे, और लोग मोहब्बत समझ लेते है॥ - श्रमेश बेटकर (महाराष्ट्राची हास्य जत्रा)

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